PUBG Game के बारे में दारुल उलूम देवबंद का फतवा।

PUBG Game के बारे में दारुल उलूम देवबंद का फतवा।

पब्जी गेम यहूदियों की इजाद (आविष्कार) है, और उसमें कई तरह के शरई मफासिद (खराबियां) पाए जाते हैं,

जिनमें से चंद नीचे दिए जाते हैं:

(1) यह गेम महज ला यानी (बे मतलब) है, उसमें वक्त, सेहत और दिमागी कुव्वत और ताकत की बर्बादी के अलावा कोई काबिले जिक्र (उल्लेखनीय) दीनी या दुनियावी फायदा नहीं है और इस्लाम इस तरह की ला यानी और बे फायदा;

बल्कि वक्त वगैरा बर्बाद करने वाली चीजों की इजाजत नहीं देता।

(2) जो शख्स इस गेम में लगता है वह उसका ऐसा रसिया और आदी हो जाता है कि उसे नमाज वगैरा क्या?

बहुत से दुनियावी जरूरी कामों का भी होश नहीं रहता.

और इस्लाम में इस तरह का कोई खेल जायज नहीं, अगरचे उसमें बेशुमार ज़ाहिरी फायदे हों।

(3) जो लोग इस गेम को बार-बार खेलते हैं उनका ज़हन नेगेटिव होने लगता है और गेम की तरह वह वाकई दुनिया और रियल लाइफ में भी मारधाड़ वगैरा के काम सोचते हैं,

जिसकी वजह से कई हादसे और घटनाओं का खतरा रहता है,

बल्कि कई बार खतरा हकीकत भी बन जाता है, जैसा कि आए दिन घटती घटनाएं शाहिद हैं।

(4) इस गेम में कार्टून की शक्ल में तस्वीर पाई जाती हैं, और इस्लाम में जानदार की तस्वीर नाजायज है।

(5) यह गेम मोबाइल या कंप्यूटर पर नेट कनेक्शन के साथ ही खेला जा सकता है उसके बगैर नहीं,

और कुछ विशषज्ञों की राय यह है कि यहूदी लॉबी, इस गेम के ज़रिए लोगों (स्पेशियली मुसलमानों) का पर्सनल डेटा महफूज करना चाहती है;

ताकि बचे खुचे चंद मुसलमानों में जो कुछ इफ्फत,पवित्रता और पाकदामनी वगैरह बाक़ी रह गई है,

उसे तारतार कर दिया जाए और पूरी दुनिया को शैतानी जाल का शिकार बना दिया जाए।

इसलिए शरीअते इस्लामी की रु से PUBG गेम खेलना हरगिज़ जाइज़ नहीं है,

लोगों को इस तरह की चीज़ों से बहुत दूर रहने की ज़रूरत है।

अल्लाह तआला हिफाजत फरमावे।

Fatwa:530-468/N=6/1440

दारुल इफ्ता देवबंद