दोस्ती के बारे में हुज़ूर ﷺ की हिदायतें !

दोस्ती के बारे में हुज़ूर ﷺ की हिदायतें!

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:

“आदमी अपने दोस्त के दीन पर होता है ,

लिहाजा हर आदमी को देखना चाहिए कि वह किसे अपना दोस्त बना रहा है।

-(तिर्मीजी:2378, अबू दाऊद:4833, अहमद:8398)

नबी ए करीम ﷺ ने फरमाया:

अच्छे और बुरे दोस्त की मिसाल मुश्क वाले और भट्टी धौंकने वाले की सी है,

लिहाजा मुश्क(कस्तूरी) वाला उसमें से या तुम्हें कुछ तोहफे के तौर पर देगा,

या तुम उससे खरीद सकोगे या (कम से कम) तुम उसकी उम्दा खुशबू से तो फायदा उठा ही सकोगे.

और भट्टी धौंकने वाला या तुम्हारे कपड़े भट्टी की आग से जला देगा या तुम्हें उसके पास से एक ना-गवार बदबूदार धुंवा पहुंचेगा।

-(सही बुखारी: 2101، अबु दावूद:4829, अहमद: 19660)

दोस्ती इंसान के अंजाम पर भी असर अंदाज होती है!

रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:

(कयामत के दिन) तू उसी के साथ होगा जिससे तूने मोहब्बत की।

-(सहीह मुस्लिम: 2640, बुखारी:6169, अबु दावूद : 5126,अहमद:21463)

यानी कयामत के दिन सिर्फ नेक लोगों की दोस्ती काम आएगी।

अहले इमान को सिर्फ मोमिन और परहेज़गार लोगों से दोस्ती करनी चाहिए.

हज़रत अबू सईद से रिवायत है के उन्होंने रसूलुल्लाह ﷺ को फरमाते हुए सुना:

” मोमिन के अलावा किसी ओर को अपना दोस्त न बनाओ,

और तुम्हारा खाना सिर्फ मुत्तक़ी आदमी को खाना चाहिए।

-(तिर्मीजी: 2395, अबु दावूद:4832, अहमद : 11355, सहीह इब्ने हिब्बान:554)

रसूले अकरम ﷺ ने बुरे दोस्त से पनाह मांगने की तालीम दी है.

नबी ए अकरम ﷺ यह दुआ मांगा करते थे:

اللهم إني أعوذُ بك من يومِ السُّوءِ , ومن ليلةِ السُّوءِ , ومن ساعةِ السُّوءِ , ومن صاحِبِ السُّوءِ , ومن جارِ السُّوءِ في دارِ المُقَامَةِ.

तर्जुमा:

” या अल्लाह मैं अपने घर में बुरे दिन और बुरी रात ,और बुरी घड़ी और बुरे दोस्त और बुरे पड़ोसी से तेरी पनाह चाहता हूं।”

-(सहिहुल जामिअ:अल्बानी:1299)