टिकटोक एक बढ़ता नासूर

टिकटोक एक बढ़ता नासूर

बेराह रवी और बे हयाई के प्रचार प्रसार में टिक टॉक एप्प बड़ा किरदार अदा कर रहा है, पश्चिम और गैरो का अंधा अनुकरण और मजहब से बेज़ारी,

और लाज लज्जा से दूरी ने हमें गंदे घड़े में फेंक दिया है,इस टिकटोक से मुस्लिम समाज के बहुत से लोग खुले आम बे शर्मी के साथ फोहड़ अदाकारी और मुजरे पर ताल ठोक रहे हैं।

नबी ए अकरम ﷺ का इरशाद है:

हया ईमान का एक शोबा है।

-(सहीह मुस्लिम: 75 )

दूसरी जगह इरशाद फरमाया ﷺ :

“अगर आप में हया नहीं तो जो जी में आए करें “।

-(अबू दाऊद: 4797)

मतबल जब इंसान में हया और लज्जा नहीं रहती तो वह जो चाहे करता है, जबकी हया तो ईमान का हिस्सा है,

मालूम हुआ कि ईमान जिसका कमज़ोर हो वोही बेहयाई करता है।

टिकटोक पर जिस प्रकार की बेपर्दगी, बेहयाई और बे गेरती और गंदी अदाकारी होती है,

कि देखने वालों के दिल में और बदन में उससे उत्तेजना पैदा होती है, और यह भी ज़िना और व्यभिचार का एक प्रकार है।

हुज़ूर ﷺ ने फरमाया:

आँखें भी ज़िना करती है, और उनका ज़िना देखना है, और हाथ भी ज़िना करते हैं, और उनका ज़िना पकड़ना है,

और पांव भी ज़िना करते हैं और उनका ज़िना चलना है, और लब भी ज़िना करते हैं और उनका ज़िना बोसा लेना (चुम्बन) है,

और दिल गुनाह की तरफ माइल होता है और उसकी ख्वाहिश करता है, और शर्मगाह उसकी तस्दीक करती है या तकज़ीब।

-(मुसनद अहमद:2/343)

जो लोग इस तरह गंद फैला रहे हैं उनके लिए दुनिया ही में पहले दर्दनाक सज़ा है, आख़िरत में तो मिलेंगी ही।

“अल्लाह पाक क़ुरान मजीद में फरमाते हैं:

“बेशक जो लोग चाहते हैं कि ईमान वालों में बे हयाई फैल जाए, उनके लिए दुनिया और आखिरत में दर्दनाक अज़ाब है,

और अल्लाह तआला जानता है और तुम नहीं जानते।”

-( सूरह नूर: 19)

जान लो! शैतान इंसान का खुला दुश्मन है, और उसने तो खुदा को चैलेंज किया था कि जब तक वह इंसान को गुमराह कर जहन्नमी न बना दे,

चैन से नहीं बैठेगा, तो वह ज़रूर ऐसे ही कामों पर इंसानो को लगाएगा, जिससे वह जहन्नमी बने।

क़ुरान में है:

तो शैतान यकीनन बे हयाई और गुनाह का हुक्म देता है।

-(सुरह नूर:21)

इसलिए अल्लाह पाक हमें ऐसी चीज़ों से रोकते हैं जो शैतानी और गुमराही हो ,ताकि हम जहन्नमी न बने।

अल्लाह पाक का हुक्म है:

“और तुम बे हयाई की चीजों के करीब मत जाओ, उनसे जो जाहिर हो और जो पोशीदा हो “।

-(सुरह अनआम:151)

दूसरी जगह

अल्लाह पाक का इरशाद है:

ए लोगो जो ईमान लाए हो, शैतान के नक्शे कदम पर ना चलो, उसकी पैरवी कोई करेगा तो वह उसे फहश और बुराई का हुक्म देगा।

-(सुरह नूर: 21)

मुसलमानों! भलाई का हुक्म देना और बुराई से रोकना हम सब का फ़रीज़ा और कर्तव्य है,

अगर बस भर नहीं रोकोंगे तो सब पर अज़ाब आएगा।(अल्लाह हिफाजत करे)

हदीस में है कि

जब किसी कॉम में फहहाशी का रिवाज बढ़ता है यहां तक के वह एलानिया और

खुल्लम खुल्ला बे हयाई करने लगती है तो उन लोगों के दरमियान प्लेग और ऐसी बीमारियां फैल जाती है

जो उनके असलाफ़ के जमाने में मौजूद नहीं थी।

-(सुनने इब्ने माजा:4155 )

अफसोस का मक़ाम तो यह है कि मर्दों से ज़्यादा यहाँ महिलाएं जलवा बिखेर रही हैं, जबकि महिलाओं को पर्दे में रहने

और खुद को मर्दों से छुपाने का हुक्म है, और जो औरत मर्दों को आकर्षित करती है ,

(ऑनलाइन या ऑफलाइन)वह जन्नत की सुगंध भी नहीं पाएंगी,

और ऐसी औरत की तरफ अल्लाह पाक रहमत की नज़र से भी नहीं देखते।

कैसी बर्बादी है, तबाही है,कि जो लोगों की नज़र में आने के लिए खुदा की नज़र से गिर जाए।

अल्लाह पाक औरतों को हुक्म फरमाते हैं।

“और अपने घरों को लाजिम पकड़ो और पुरानी जाहिलियत (परंपरा) के मुताबिक खुद को दिखाती मत फिरो।

-(33/33)

कुछ लोग एंटरटेनमेंट और लोगों को हंसाने के तरह तरह की भाँड़गिरी करते हैं, जैसे आंखों के काजल की ….

या पीछे से हवा छोड़ने वाली…वीडियो..वगैरह वगैरह

ऐसे लोगों के खिलाफ हुज़ूरﷺ ने दुआ की है

” बर्बादी है उस शख्स के लिए जो लोगों को हंसाने के लिए झूठ बोले,उसके लिए बर्बादी है, उसके लिए बर्बादी है। “

-(मुसनदे अहमद,तिर्मिज़ी,अबु दावूद)

टिक तोक म्यूजिकली

यह एप्लिकेशन संगीत के साथ वीडियो क्रिएट करता है और म्यूजिक इस्लाम में जाइज़ नहीं

रसूलुल्लाहﷺ ने फ़रमाया:

मेरी उम्मत में ऐसे लोग पैदा होंगे जो ज़िना को,रेशम को, शराब को और मआज़ीफ यानि साज़ के आलात और मिजराब और गाने बजाने को हलाल कर लेंगे”

(बुखारी शरीफ:

بخاری۔ کتاب الاشربہ باب ما جاء فیمن یستحل الخمرو
بسمیہ بفراسمیہ)

अल्लाह के रसूल ﷺ ने फ़रमाया:

दुनिया और आख़िरत में दो आवाज़े मलऊन हैं:एक तो ख़ुशी के मौके पर बाजों की आवाज़ और दूसरी मुसीबत के मौके पर हलाकत (नौहा ख्वानी वगैरा)की आवाज़।

-(मुसनदे बज़्ज़ार:1/377,सिल्सिलतुल अहादीस-सहिहः२/७९०)

याद रखो!

तबले की थाप पर… डी जे की धमक पर…

घुंघरूओं की झनकार पर… टिक टोक पर मुजरा करने…

और

रंडियों के गाने की आवाज़ पर झूमने वाली माओं के पेट से

ख़ालिद इब्ने वलीद… मुहम्मद बिन क़ासिम…

तारिक़ बिन ज़ियाद , पैदा नहीं होते

 बल्कि ,भांड, बदकार, अदाकार

अय्याश, जुआरी

और शराबी पैदा होते हैं।